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CG NEWS : तो बच जाती मासूम की जिंदगी! गाज गिरने से मौतों के पीछे लापरवाही और जागरूकता की कमी

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रायपुर। राजधानी रायपुर में पिछले हफ्ते स्कूल के खेल मैदान में मासूम बालक की गाज गिरने से हुई दर्दनाक मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इन हादसों का जिम्मेदार कौन है – प्रशासन, स्कूल प्रबंधन या जलवायु परिवर्तन?

विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और तापमान-आर्द्रता में बढ़ोतरी के चलते 2019 से 2023 के बीच देश में बिजली गिरने की घटनाएं करीब 53% बढ़ी हैं। कुछ राज्यों में यह वृद्धि 300% तक दर्ज की गई। 2025 में महज तीन दिनों (10 से 12 अप्रैल) में मध्य और पूर्व भारत में गाज गिरने से 126 मौतें हुईं, जिनमें 6 मौतें छत्तीसगढ़ में दर्ज की गईं।

विशेषज्ञ नितिन सिंघवी का कहना है कि यदि स्कूल प्रशासन दामिनी ऐप का उपयोग करता, तड़ित चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) लगाया होता और बच्चों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाता तो इस मासूम की जान बच सकती थी।

स्कूल और ग्रामीण क्षेत्रों में बरती जाए सावधानी

विशेषज्ञों ने कहा कि अब प्रत्येक स्कूल में तड़ित चालक लगाना अनिवार्य किया जाए। बादलों की गर्जना और बिजली कड़कने पर बच्चों को तुरंत कक्षा में सुरक्षित करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम, सायरन और पंचायत स्तर पर सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

सरकार द्वारा बनाए गए दामिनी ऐप का प्रचार-प्रसार ग्रामीण इलाकों तक होना चाहिए। साथ ही, लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि गाज गिरने के समय पेड़, तालाब, नदी किनारे और खुले मैदानों में खड़े होना खतरनाक होता है।

क्या करें और क्या न करें

खुले मैदान या पेड़ के नीचे न खड़े हों।

बाइक/साइकिल रोककर सुरक्षित जगह जाएं।

कार में रहते समय धातु के हिस्सों को न छुएं और खिड़की बंद रखें।

मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग से डिस्कनेक्ट करें और बिजली उपकरण बंद करें।

गीली वस्तुओं से दूर रहें।

जलवायु संकट से निपटने की जरूरत

विशेषज्ञों ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन अब जलवायु संकट बन चुका है। आने वाले समय में हीट वेव, अतिवृष्टि, सूखा, गाज गिरना और चरम मौसमी घटनाएं और बढ़ेंगी। ऐसे में प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर तैयारी करनी होगी।

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