बीजापुर। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर गांवों को बेहतर सड़क सुविधा देने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलटी है। बीजापुर जिले की उसूर तहसील स्थित बासागुड़ा-कुम्हारपारा सड़क इसका जीता-जागता उदाहरण है।
साल 2020 में ठेकेदार आकाश चांडक ने 60 लाख की लागत से 1.60 किमी लंबी सड़क का निर्माण कराया था। पांच साल बीत जाने के बावजूद न तो इसकी मरम्मत हुई और न ही देखरेख। अब हालत यह है कि सड़क पूरी तरह से गड्ढों, झाड़ियों और उखड़े किनारों से भर चुकी है।
ग्रामीणों की परेशानी
धरमापुर, मल्लेपल्ली और डल्ला गांव के करीब 1000 ग्रामीण रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर पैदल या वाहन से चलना नदी पार करने से कम खतरनाक नहीं है। कहीं गड्ढे तो कहीं झाड़ियां, जिसने इस सड़क को “मौत का जाल” बना दिया है।
विभाग ने भेजा नोटिस
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में शुरू से ही लापरवाही बरती गई और ठेकेदार ने अधूरा काम छोड़ दिया। इस मामले पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता नवीन कुमार टोंडे और उप अभियंता परमानंद रामटेके ने बताया कि ठेकेदार को 5 अगस्त 2025 को मरम्मत करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। यदि काम शुरू नहीं हुआ तो विभाग 18 लाख रुपये की वसूली करेगा।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ग्रामीणों को पांच साल से झेलनी पड़ी इस परेशानी का जिम्मेदार कौन है? और कब तक ग्रामीणों को कागजों पर बनी योजनाओं का खामियाजा भुगतना पड़ेगा?

