रायपुर/हैदराबाद, अप्रैल 2025:
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ पर एंटी नक्सल ऑपरेशन का आज नौवां दिन है। बीते मंगलवार को सुरक्षा बलों ने इस दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र पर पूर्ण कब्जा कर लिया। हेलीकॉप्टर की मदद से 500 से अधिक जवानों को पहाड़ पर उतारा गया, जिसका वीडियो भी सामने आया है, जो ऑपरेशन की गंभीरता और रणनीतिकता को दर्शाता है।
इस ऑपरेशन में पहले सिर्फ छत्तीसगढ़ पुलिस, तेलंगाना पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स शामिल थीं। लेकिन अब इसमें बिहार और झारखंड के सेंट्रल फोर्स के जवान भी शामिल हो गए हैं, जो इस मिशन को और व्यापक बना रहा है।
नक्सलियों के गढ़ में फोर्स की घेराबंदी
कर्रेगुट्टा पहाड़, जो अब तक नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, बेहद बीहड़ और गर्म इलाका है। यहां का तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे कई जवान डिहाइड्रेशन का शिकार हो चुके हैं। अब तक दो जवान आईईडी ब्लास्ट में घायल हुए हैं, जबकि फोर्स ने तीन महिला नक्सलियों को मार गिराया है।
ऑपरेशन में शामिल हैं 12 हजार से अधिक जवान
बताया जा रहा है कि ऑपरेशन में अब तक 10 से 12 हजार जवानों को तैनात किया गया है, जो नक्सलियों की घेराबंदी और उनके बंकरों को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। अब फोर्स की नजर कर्रेगुट्टा से लगे दो और पहाड़ों पर है, जिन पर कब्जा करने की योजना बनाई जा रही है।
भोपालपटनम की ओर बढ़ेगी फोर्स
ऑपरेशन के विस्तार के तहत अब भोपालपटनम की ओर से भी फोर्स की आवाजाही शुरू की जाएगी। इससे नक्सलियों की हर दिशा से घेरेबंदी और दबाव और अधिक बढ़ेगा।
आईबी चीफ तपन डेका पहुंचे रायपुर, उच्चस्तरीय बैठक
इस बीच, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के प्रमुख तपन डेका ने रायपुर पहुंचकर अधिकारियों के साथ सुरक्षा और रणनीति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में तय किया गया कि ऑपरेशन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों से बैकअप फोर्स बुलाई जाएगी।
तेलंगाना में शांति वार्ता की अपील, छत्तीसगढ़ का विरोध
ऑपरेशन के बीच तेलंगाना के शांतिवार्ता समिति के सदस्य ने सीएम रेवंत रेड्डी से मुलाकात कर ऑपरेशन को रोकने की अपील की। उन्होंने केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की सलाह दी। हालांकि, छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने शांति वार्ता को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “जब छत्तीसगढ़ के आदिवासी मारे गए थे, तब किसी को पीड़ा नहीं हुई, अब ऑपरेशन के खिलाफ आवाज उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
निष्कर्ष:
कर्रेगुट्टा पहाड़ में चल रहा यह ऑपरेशन देश के सबसे बड़े एंटी नक्सल अभियानों में से एक बन चुका है। इसमें न केवल सैन्य रणनीति की परीक्षा हो रही है, बल्कि राज्यों के बीच सामंजस्य और राजनीतिक दृष्टिकोण की भी परीक्षा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ऑपरेशन कितनी सफलता हासिल करता है और नक्सल गतिविधियों पर कितना प्रभाव डालता है।

