बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के करवा ग्राम पंचायत में बीती रात जंगली हाथियों के दल ने जमकर तबाही मचाई। रात के अंधेरे में गांव में घुसे 8-10 हाथियों ने धान की तैयार फसलों को रौंद डाला और चार घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद हो गई, जिससे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीण रातभर टॉर्च और शोर के साथ पहरेदारी करने को मजबूर हैं। वन विभाग की टीम मौके पर डटी है, लेकिन हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ना चुनौती बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, यह दल चार दिन से क्षेत्र में सक्रिय है। पहले प्रतापपुर में देखे गए ये हाथी अब करवा पहुंचे। ग्रामीणों ने टॉर्च की रोशनी और शोर से उन्हें भगाने की कोशिश की, लेकिन बेखौफ हाथी फसलों को चरते रहे। एक किसान रामलाल ने बताया, “हमारी धान की फसल खत्म हो गई। अब परिवार का क्या होगा?” वन विभाग के अनुसार, खनन और कृषि विस्तार से हाथियों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ा, जिससे वे बस्तियों की ओर आ रहे हैं।
वन विभाग ने पेट्रोलिंग बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ग्रामीण मुआवजे और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। महिलाएं और बच्चे डर से घरों में दुबके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए आरक्षित क्षेत्र और बाड़ेबंदी जरूरी है। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करती है।

