रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलरामपुर जिले में गणेश विसर्जन के दौरान डीजे पर नाचते समय नाबालिग की मौत के मामले को गंभीरता से लिया है। मंगलवार को जनहित याचिका पर हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि वर्तमान में कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में इतने सख्त प्रावधान नहीं हैं। फिलहाल केवल 500 से 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाकर कार्रवाई पूरी कर दी जाती है, ना उपकरण जब्त होते हैं और ना ही कोई कड़े दंडात्मक कदम उठाए जाते हैं। शासन ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
कानूनी स्थिति पर चर्चा करते हुए कोर्ट को बताया गया कि 1985 का राज्य अधिनियम और 2000 के केंद्रीय ध्वनि प्रदूषण नियम में टकराव की स्थिति में केंद्रीय नियम लागू होंगे। इन नियमों के अनुसार लाउडस्पीकर और डीजे के लिए निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन अनिवार्य है और अनुमति लेना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने सरकार को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में राज्य शासन को अपने कदमों की जानकारी देनी होगी।

