बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मेडिकल एडमिशन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। तीन छात्राओं – सुहानी सिंह, श्रेयांशी गुप्ता और भव्या मिश्रा – ने NEET परीक्षा पास करने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर MBBS में दाखिला लिया था।
तहसील कार्यालय की जांच में खुलासा हुआ कि इन छात्राओं के EWS प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी थे। तहसीलदार गरिमा ठाकुर ने बताया कि प्रमाणपत्रों की सील और हस्ताक्षर नकली पाए गए और उनके नाम से कोई आवेदन दर्ज नहीं था। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों का एडमिशन रद्द कर दिया।
यह मामला 9 सितंबर 2025 को सामने आया, जिससे मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए। विभाग ने कहा है कि अब सभी दस्तावेजों का सख्ती से सत्यापन किया जाएगा। दोषी छात्राओं को इस साल किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिलेगा और उन पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
यह कदम असली हकदार विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा करने और सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
