बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई महिला संविदा कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक साबित हुई। जिला अस्पताल कबीरधाम में कार्यरत संविदा स्टाफ नर्स को मातृत्व अवकाश अवधि का पूरा वेतन भुगतान करने की जानकारी शासन ने कोर्ट को दी। यह फैसला प्रदेश की हजारों महिला संविदा कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर महिला सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा था।
मामला तब शुरू हुआ जब याचिकाकर्ता स्टाफ नर्स ने 16 जनवरी से 16 जुलाई 2024 तक मातृत्व अवकाश लिया था। अवकाश अवधि विधिवत स्वीकृत होने के बावजूद शासन ने वेतन का भुगतान नहीं किया। जबकि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 में मातृत्व अवकाश वेतन का स्पष्ट प्रावधान है। इस पर नर्स ने रिट याचिका और बाद में अवमानना याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने शासन को कड़े शब्दों में फटकार लगाई थी और कहा था कि यह मामला सिर्फ आर्थिक अधिकार का नहीं बल्कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान से जुड़ा है।
आज की सुनवाई में शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि नर्स को मातृत्व अवकाश की अवधि का पूरा वेतन जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही अवमानना याचिका का निपटारा हो गया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने कहा- “यह केवल एक स्टाफ नर्स की जीत नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की उन महिला संविदा कर्मचारियों की जीत है, जो मातृत्व अवकाश वेतन को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रही थीं। न्यायालय ने साफ कर दिया है कि मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है, चाहे वे नियमित हों या संविदा।”
