बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एसईसीएल द्वारा दायर पुनर्वास नीति से जुड़े अपील पर बड़ा फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को उसी पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा, जो अधिग्रहण की तिथि पर प्रभावी थी। कोर्ट ने एसईसीएल की अपील को खारिज कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभु दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि रोजगार और पुनर्वास का अधिकार भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से सीधे जुड़ा हुआ है और यह मौलिक अधिकार है, जिसे बाद में नीति में बदलाव कर छीना नहीं जा सकता।
कोर्ट ने पुनः दोहराया कि भूमि अधिग्रहण किस अधिनियम के तहत हुआ है, यह मायने नहीं रखता, बल्कि अधिग्रहण की तिथि पर जो नीति प्रभावशील थी, उसके तहत पात्र व्यक्तियों को लाभ देना एसईसीएल की जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इसी तरह के मामले में पहले ‘प्यारे लाल’ केस में निर्णय हो चुका है, जिसे चुनौती भी नहीं दी गई थी। इसलिए वर्तमान अपील में कोई नया आधार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि इस मुद्दे में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए 29 जुलाई 2025 के पूर्व आदेश के अनुसार ही मामले का निपटारा किया जाएगा।
