बिलासपुर। जिले में एक बार फिर यूरिया संकट गहराता नजर आ रहा है। सहकारी सोसाइटियों में खाद की किल्लत से किसान बेहाल हैं। हालात यह हैं कि गरीब किसान घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, कई बार तो दो-दो दिन भूखे-प्यासे इंतजार करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ता है।
सरकार का दावा है कि यूरिया का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन हकीकत यह है कि सोसाइटियों तक खाद की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही। मजबूर किसान स्थानीय कृषि केंद्रों से महंगे दामों पर यूरिया खरीद रहे हैं, जहाँ व्यापारी इसे 500 से 1500 रुपये प्रति बोरी तक बेच रहे हैं।
इस कालाबाजारी का सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है। कई किसान प्रति एकड़ 1 बोरी की जगह 10 किलो कम यूरिया डालने को मजबूर हैं, जो उनके लिए बड़ा संकट है।

कृषि विभाग का कहना है कि कालाबाजारी रोकने के लिए 318 स्थानों पर निरीक्षण किए गए हैं। इनमें 111 को नोटिस जारी, 8 केंद्र प्रतिबंधित और 3 कृषि केंद्रों का लाइसेंस 21 दिनों के लिए निलंबित किया गया है।

अब सवाल यह उठता है कि जब संभाग और जिला स्तर की टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं, तो सर्किल स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों हैं? क्या उन्हें कालाबाजारी की जानकारी नहीं है या फिर यह सब मिलीभगत से हो रहा है?
