March 6, 2026
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गरियाबंद के स्वास्थ्य केंद्रों में बिना मांग भेजी गई लाखों की दवा: जनपद सदस्य ने किया खुलासा, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

गरियाबंद, अप्रैल 2025:
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गरियाबंद जिले के उरमाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बिना किसी औपचारिक मांग के लाखों रुपए मूल्य की दवाओं की आपूर्ति का मामला सामने आया है। इस कथित गड़बड़ी का खुलासा जनपद सदस्य माखन कश्यप ने किया, जिन्होंने पंचायत बॉडी के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण कर स्थिति को उजागर किया।


क्या है मामला?

जनपद सदस्य माखन कश्यप ने उरमाल पीएचसी में निरीक्षण के दौरान पाया कि वहां बड़ी मात्रा में दवाएं रखी गई हैं, जिसकी स्थानीय डॉक्टरों या स्वास्थ्य केंद्र द्वारा कोई मांग नहीं भेजी गई थी।
कश्यप ने आरोप लगाया कि यह स्थिति बिलकुल वैसी ही है जैसे पहले सामने आए CGMSC के 550 करोड़ रुपये के चर्चित घोटाले में थी। उन्होंने इसे “पार्ट-2 घोटाला” करार देते हुए संदेह जताया कि यह एक सुनियोजित तरीके से दवाओं की आपूर्ति और बिल के माध्यम से पैसे की बंदरबांट का मामला हो सकता है।


प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश

इस गंभीर आरोप के बाद गरियाबंद कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से जांच टीम गठित करने का आदेश दिया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि

  • एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
  • यदि आरोपों में सत्यता मिलती है, तो आपूर्ति और भंडारण में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष और ग्रामीणों में आक्रोश

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि

  • जहां कई स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाएं समय पर नहीं मिलतीं,
  • वहीं बिना मांग के लाखों की दवाएं अनावश्यक रूप से भेजकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

वहीं माखन कश्यप ने इसे बड़ी भ्रष्टाचार की साजिश बताते हुए जांच की मांग उच्चस्तरीय एजेंसी से कराने की भी बात कही है।


CGMSC पहले भी विवादों में

यह पहली बार नहीं है जब CGMSC पर गंभीर आरोप लगे हों। पूर्व में भी छत्तीसगढ़ में मेडिकल सप्लाई और उपकरण खरीद को लेकर करोड़ों के घोटाले के आरोप लगे थे।

  • दवाओं की एक्सपायरी,
  • बिना जरूरत की सप्लाई,
  • भंडारण में अनियमितता जैसे कई मुद्दे सामने आए थे।

निष्कर्ष

गरियाबंद में सामने आया यह मामला केवल एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक सीमित नहीं हो सकता। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में व्यवस्थित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।