March 6, 2026
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कर्रेगुट्टा पर फहराया तिरंगा: नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी जीत की ओर भारत

बीजापुर, छत्तीसगढ़ | अप्रैल 2025

देशभर में नक्सलवाद के खिलाफ जारी सुरक्षा बलों की लड़ाई ने एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी, जो वर्षों से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था, अब भारत के नियंत्रण में है। सुरक्षा बलों ने इस पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर नक्सलवाद के किले में सबसे गहरी चोट की है।


9 दिन का सबसे बड़ा ऑपरेशन

यह देश में नक्सलवाद के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य ऑपरेशन माना जा रहा है।

  • कर्रेगुट्टा पहाड़ को फतह करने के लिए पिछले 9 दिनों से 10,000 से अधिक जवानों की टुकड़ियां सघन अभियान चला रही थीं।
  • सुरक्षा बलों ने यहां हेलीकॉप्टर से जवानों को उतारकर चारों ओर से घेराबंदी की, जिसके बाद इस दुर्गम क्षेत्र में पहली बार भारत का झंडा फहराया गया।

रणनीतिक दृष्टि से बड़ी जीत

कर्रेगुट्टा पहाड़ी को नक्सलियों ने लंबे समय से अपना सुरक्षित बेस बना रखा था।

  • यहां से वे आसपास के क्षेत्रों में संचालन, ट्रेनिंग, और हमले की योजनाएं बनाते थे।
  • पहाड़ी पर कब्जा मिलने से न केवल नक्सलियों की रणनीतिक कमर टूटी है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि अब उनका दबदबा खत्म होने की कगार पर है।

ऑपरेशन में दिखा अदम्य साहस

इस ऑपरेशन में जवानों ने भीषण गर्मी, दुर्गम रास्तों और लगातार आईईडी खतरों के बावजूद अदम्य साहस दिखाया।

  • कुछ जवान डिहाइड्रेशन और चोटों से भी जूझते रहे, फिर भी मोर्चा नहीं छोड़ा।
  • ऑपरेशन में तीन महिला नक्सलियों को ढेर किया गया, और कई बंकर ध्वस्त किए गए।

नक्सलवाद के अंत की ओर

विशेषज्ञों का मानना है कि कर्रेगुट्टा पर तिरंगा फहराना नक्सलवाद के इतिहास में निर्णायक क्षण है।

  • यह लाल आतंक के खिलाफ लड़ाई को अंतिम चरण में ले आया है।
  • अब सुरक्षा बलों का लक्ष्य शेष बचे ठिकानों को भी खत्म करना और सामान्य जीवन बहाल करना है।

सरकार और प्रशासन की सराहना

इस सफलता पर राज्य और केंद्र सरकारों ने सुरक्षा बलों को बधाई दी है।
छत्तीसगढ़ के गृह विभाग और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने भी कहा है कि यह कार्रवाई आने वाले समय में पूरे बस्तर क्षेत्र को नक्सल-मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।


निष्कर्ष

कर्रेगुट्टा पर तिरंगे का लहराना केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि आम जनता के मन से डर को हटाने और लोकतंत्र की जीत का प्रतीक बन गया है।
यह नक्सलवाद के खिलाफ दशकों से चल रही लड़ाई में भारत की सबसे बड़ी जीतों में से एक के रूप में दर्ज होगी।