बिलासपुर, 2 मई — छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल अपोलो में लंबे समय से फर्जी तरीके से डॉक्टर बनकर कार्य कर रहे नरेंद्र जॉन केम को बिलासपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी एक बड़े स्वास्थ्य घोटाले की ओर संकेत कर रही है, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बिना डिग्री, मरीजों का इलाज
जानकारी के अनुसार, नरेंद्र जॉन केम के पास किसी भी मान्यता प्राप्त मेडिकल काउंसिल की वैध डिग्री नहीं है, इसके बावजूद वह डॉक्टर की पहचान के साथ अपोलो जैसे बड़े अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहा था। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि वह कई वर्षों से खुद को डॉक्टर बताकर गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहा था।
मौत के मामलों में भी संलिप्तता
नरेंद्र जॉन केम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बताया कि उसके इलाज के दौरान कई मरीजों की मौत हुई थी, जिनमें एक नाम पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. राजेंद्र शुक्ल का भी है। शुक्ल जी के परिजनों ने पहले ही इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। अब जब यह स्पष्ट हुआ है कि इलाज फर्जी डॉक्टर द्वारा किया गया था, तो यह मामला और भी गंभीर हो गया है।
कोर्ट में पेशी और पहचान परेड
बिलासपुर पुलिस आरोपी को पकड़कर शहर लेकर आ चुकी है। उसे स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस उसे अपोलो अस्पताल ले जाकर मृतकों के परिजनों के सामने पहचान परेड कराएगी, जिससे यह पुष्टि हो सके कि इलाज उन्हीं के द्वारा किया गया था या नहीं।
एसएसपी ने की पुष्टि
बिलासपुर के एसएसपी रजनेश सिंह ने डॉक्टर नरेंद्र जॉन केम की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि, “यह एक संवेदनशील मामला है। आरोपी को पकड़ लिया गया है और पूछताछ जारी है। जांच में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका भी खंगाली जा रही है। यदि लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चुप्पी
इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह अब जांच का विषय है कि एक फर्जी डॉक्टर इतने लंबे समय तक एक बड़े अस्पताल में कैसे काम करता रहा, और अस्पताल प्रबंधन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है, बल्कि आम जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ का भी बड़ा उदाहरण बन गया है। लोगों की मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए कड़ी निगरानी और सख्त नियम लागू किए जाएं।
