बीजापुर। शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत बीजापुर जिले में पोर्टा केबिनों की सप्लाई और भुगतान में भारी गड़बड़ी सामने आई है।
जिले के चार विकासखंड—बीजापुर, भोपालपट्टनम, भैरमगढ़ और उसूर—में बनाए गए 26 पोर्टा केबिनों पर करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक का भुगतान बिना किसी टेंडर प्रक्रिया या भंडार क्रय नियम का पालन किए किया गया।
जांच में खुला फर्जीवाड़ा
एसडीएम स्तर की जांच में बीजापुर और भोपालपट्टनम क्षेत्र के 11 पोर्टा केबिनों में फर्जी भुगतान के पुख्ता दस्तावेज मिले। बाद में भैरमगढ़ और उसूर ब्लॉकों की भी जांच हुई, जहां गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं।
प्रशासन की कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने 24 अधीक्षकों को पद से हटा दिया है और उनकी जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है। साथ ही इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
पहले ही दर्ज हो चुकी हैं दो एफआईआर
इस घोटाले में अब तक दो कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। संकेत हैं कि आगे अधीक्षकों पर भी कार्रवाई तय है।

शिक्षा पर सवाल
यह मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ भी है। पोर्टा केबिन उन इलाकों में बनाए जाते हैं जहां स्थायी भवन संभव नहीं, लेकिन जब इन योजनाओं में भी टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर घोटाला हो रहा है, तो यह सीधे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है।
